तृणादपि सुनीचेन तरोरपि सहिष्णुना अमानिना मानदेन कीर्तनीयः सदा हरिः
“तृणादपि सुनीचेन” श्लोक का भावार्थ जानें — कैसे एक भक्त तृण से भी नीचा, वृक्ष से भी सहनशील होकर सच्ची भक्ति की …
श्री राधे राधे
“तृणादपि सुनीचेन” श्लोक का भावार्थ जानें — कैसे एक भक्त तृण से भी नीचा, वृक्ष से भी सहनशील होकर सच्ची भक्ति की …