तृणादपि सुनीचेन तरोरपि सहिष्णुना अमानिना मानदेन कीर्तनीयः सदा हरिः

Trinadapi Sunichena Shloka Meaning

“तृणादपि सुनीचेन” श्लोक का भावार्थ जानें — कैसे एक भक्त तृण से भी नीचा, वृक्ष से भी सहनशील होकर सच्ची भक्ति की …

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